यह निरूदेशय जीवन मुझे स्वीकार नही
मुझे स्वीकार नही यह कठिनाइयों से रीता जीवन
मुझे तो अभी उड़ना है ,
अपनी सबसे ऊँची उड़ान ॥
कठिनाइयों को परखना है
पहाडों को फांदना है ॥
कितने ही अभागे हैं इस संसार में
उनके साथ भी तो चलना है
उनके दर्द को महसूस करके
उन्हें असीम प्रेम भी तो देना है ॥
तभी शायद सफल होगा ये जीवन
ये निर्रुदेशय जीवन ॥
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Thursday, September 24, 2009
जीवन :)
एक तारीख और बदल गई
एक सवेरा और आ गया,
सुबह से शाम हुई
और फ़िर शाम से सुबह हो गई
इंसां लगा रहता है जिंदगी की दौड़ धुप में
दो वक्त की रोटी की चाहत में
कोई हल चलाता है तो कोई
चन्द्र यान चलाता है ,
पर सोचता हूँ मैं आजकल
इस भाग दौड़ में ,सुबह शाम में
इंसां जीता कब है ??
क्या यही जीना है ??
निरुद्देश्य जीवन !!!
क्या कभी देखा अपने अन्दर झाँक के
कि मैं कौन हूँ ...
क्या उद्देश्य है इस जनम का,
शायद कभी सोचने का वक्त नही है ...
अरे याद आया !!!
घर राशन ले के जाना है और
हाँ, बिजली का बिल भी तो भरना है ॥
चलो अपने बारे में फ़िर कभी सोचेंगे...
सुबह और शाम की ख़बर भी ले लेंगे
जल्दी क्या है ॥
जी लेंगे ॥
एक सवेरा और आ गया,
सुबह से शाम हुई
और फ़िर शाम से सुबह हो गई
इंसां लगा रहता है जिंदगी की दौड़ धुप में
दो वक्त की रोटी की चाहत में
कोई हल चलाता है तो कोई
चन्द्र यान चलाता है ,
पर सोचता हूँ मैं आजकल
इस भाग दौड़ में ,सुबह शाम में
इंसां जीता कब है ??
क्या यही जीना है ??
निरुद्देश्य जीवन !!!
क्या कभी देखा अपने अन्दर झाँक के
कि मैं कौन हूँ ...
क्या उद्देश्य है इस जनम का,
शायद कभी सोचने का वक्त नही है ...
अरे याद आया !!!
घर राशन ले के जाना है और
हाँ, बिजली का बिल भी तो भरना है ॥
चलो अपने बारे में फ़िर कभी सोचेंगे...
सुबह और शाम की ख़बर भी ले लेंगे
जल्दी क्या है ॥
जी लेंगे ॥
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