यह निरूदेशय जीवन मुझे स्वीकार नही
मुझे स्वीकार नही यह कठिनाइयों से रीता जीवन
मुझे तो अभी उड़ना है ,
अपनी सबसे ऊँची उड़ान ॥
कठिनाइयों को परखना है
पहाडों को फांदना है ॥
कितने ही अभागे हैं इस संसार में
उनके साथ भी तो चलना है
उनके दर्द को महसूस करके
उन्हें असीम प्रेम भी तो देना है ॥
तभी शायद सफल होगा ये जीवन
ये निर्रुदेशय जीवन ॥
Showing posts with label उड़ान. Show all posts
Showing posts with label उड़ान. Show all posts
Thursday, September 24, 2009
Subscribe to:
Posts (Atom)
